पौण्ड्रकका दूत द्वारका आया और राजसभामें बैठे हुए कमलनयन भगवान् श्रीकृष्णको उसने अपने राजाका यह सन्देश कह सुनाया—॥ ४॥
दूतस्तु द्वारकामेत्य सभायामास्थितं प्रभुम्।
कृष्णं कमलपत्राक्षं राजसन्देशमब्रवीत्॥ ४
पौण्ड्रकका दूत द्वारका आया और राजसभामें बैठे हुए कमलनयन भगवान् श्रीकृष्णको उसने अपने राजाका यह सन्देश कह सुनाया—॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.66.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 546) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/66/4/