श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.66.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 66 · अथ षट्षष्टितमोऽध्यायः

दूतं च प्राहिणोन्मन्दः कृष्णायाव्यक्तवर्त्मने।

द्वारकायां यथा बालो नृपो बालकृतोऽबुधः॥ ३

dūtaṃ ca prāhiṇonmandaḥ kṛṣṇāyāvyaktavartmane|

dvārakāyāṃ yathā bālo nṛpo bālakṛto'budhaḥ|| 3

अर्थ

जैसे बच्चे आपसमें खेलते समय किसी बालकको ही राजा मान लेते हैं और वह राजाकी तरह उनके साथ व्यवहार करने लगता है, वैसे ही मन्दमति अज्ञानी पौण्ड्रकने अचिन्त्यगति भगवान् श्रीकृष्णकी लीला और रहस्य न जानकर द्वारकामें उनके पास दूत भेज दिया॥ ३॥

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