काशीका राजा पौण्ड्रकका मित्र था। अतः वह भी उसकी सहायता करनेके लिये तीन अक्षौहिणी सेनाके साथ उसके पीछे-पीछे आया। परीक्षित्! अब भगवान् श्रीकृष्णने पौण्ड्रकको देखा॥ १२॥✎ 1700
तस्य काशिपतिर्मित्रं पार्ष्णिग्राहोऽन्वयान्नृप।
अक्षौहिणीभिस्तिसृभिरपश्यत् पौण्ड्रकं हरिः॥ १२
काशीका राजा पौण्ड्रकका मित्र था। अतः वह भी उसकी सहायता करनेके लिये तीन अक्षौहिणी सेनाके साथ उसके पीछे-पीछे आया। परीक्षित्! अब भगवान् श्रीकृष्णने पौण्ड्रकको देखा॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.66.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 547) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/66/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)