श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.66.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 66 · अथ षट्षष्टितमोऽध्यायः

पौण्ड्रकोऽपि तदुद्योगमुपलभ्य महारथः।

अक्षौहिणीभ्यां संयुक्तो निश्‍चक्राम पुराद् द्रुतम्॥ ११

pauṇḍrako'pi tadudyogamupalabhya mahārathaḥ|

akṣauhiṇībhyāṃ saṃyukto niścakrāma purād drutam|| 11

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णके आक्रमणका समाचार पाकर महारथी पौण्ड्रक भी दो अक्षौहिणी सेनाके साथ शीघ्र ही नगरसे बाहर निकल आया॥ ११॥✎ 1700

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1700 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: काशि-राजके → काशिराजके

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