जब वे यथेष्ट जल-विहार करके यमुनाजीसे बाहर निकले, तब लक्ष्मीजीने उन्हें नीलाम्बर, बहुमूल्य आभूषण और सोनेका सुन्दर हार दिया॥ २९॥
कामं विहृत्य सलिलादुत्तीर्णायासिताम्बरे।
भूषणानि महार्हाणि ददौ कान्तिः शुभां स्रजम्॥ २९
जब वे यथेष्ट जल-विहार करके यमुनाजीसे बाहर निकले, तब लक्ष्मीजीने उन्हें नीलाम्बर, बहुमूल्य आभूषण और सोनेका सुन्दर हार दिया॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.65.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 545) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/65/29/