श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.64.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 64 · अथ चतुःषष्टितमोऽध्यायः

अनुनीतावुभौ विप्रौ धर्मकृच्छ्रगतेन वै।

गवां लक्षं प्रकृष्टानां दास्याम्येषा प्रदीयताम्॥ १९

anunītāvubhau viprau dharmakṛcchragatena vai|

gavāṃ lakṣaṃ prakṛṣṭānāṃ dāsyāmyeṣā pradīyatām|| 19

अर्थ

मैंने धर्मसंकटमें पड़कर उन दोनोंसे बड़ी अनुनय-विनय की और कहा कि ‘मैं बदलेमें एक लाख उत्तम गौएँ दूँगा। आपलोग मुझे यह गाय दे दीजिये॥ १९॥

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