sūditaṃ ca balaṃ bhūri yacca bhārāyitaṃ bhuvaḥ|| 48
अर्थ
इसका घमंड चूर करनेके लिये ही मैंने इसकी भुजाएँ काट दी हैं। इसकी बहुत बड़ी सेना पृथ्वीके लिये भार हो रही थी, इसीलिये मैंने उसका संहार कर दिया है॥ ४८॥
दर्पोपशमनायास्य प्रवृक्णा बाहवो मया।
सूदितं च बलं भूरि यच्च भारायितं भुवः॥ ४८
इसका घमंड चूर करनेके लिये ही मैंने इसकी भुजाएँ काट दी हैं। इसकी बहुत बड़ी सेना पृथ्वीके लिये भार हो रही थी, इसीलिये मैंने उसका संहार कर दिया है॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 535) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/63/48/