श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.61.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 61 · अथैकषष्टितमोऽध्यायः

नैवाक्षकोविदा यूयं गोपाला वनगोचराः।

अक्षैर्दीव्यन्ति राजानो बाणैश्‍च न भवादृशाः॥ ३५

naivākṣakovidā yūyaṃ gopālā vanagocarāḥ|

akṣairdīvyanti rājāno bāṇaiśca na bhavādṛśāḥ|| 35

अर्थ

‘बलरामजी! आखिर आपलोग वन-वन भटकनेवाले ग्वाले ही तो ठहरे! आप पासा खेलना क्या जानें? पासों और बाणोंसे तो केवल राजालोग ही खेला करते हैं, आप-जैसे नहीं’॥ ३५॥✎ 1696

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1696 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: धर्म-पूर्वक → धर्मपूर्वक

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