॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.60.11
तान् प्राप्तानर्थिनो हित्वा चैद्यादीन् स्मरदुर्मदान्।
दत्ता भ्रात्रा स्वपित्रा च कस्मान्नो ववृषेऽसमान्॥ ११
tān prāptānarthino hitvā caidyādīn smaradurmadān|
dattā bhrātrā svapitrā ca kasmānno vavṛṣe'samān|| 11
अर्थ
तुम्हारे पिता और भाई भी उन्हींके साथ तुम्हारा विवाह करना चाहते थे, यहाँतक कि उन्होंने वाग्दान भी कर दिया था। शिशुपाल आदि बड़े-बड़े वीरोंको, जो कामोन्मत्त होकर तुम्हारे याचक बन रहे थे, तुमने छोड़ दिया और मेरे-जैसे व्यक्तिको, जो किसी प्रकार तुम्हारे समान नहीं है, अपना पति स्वीकार किया। ऐसा तुमने क्यों किया?॥ ११॥✎ 1438