श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.59.42

दशम स्कन्ध · अध्याय 59 · अथैकोनषष्टितमोऽध्यायः

अथो मुहूर्त एकस्मिन् नानागारेषु ताः स्त्रियः।

यथोपयेमे भगवांस्तावद्रूपधरोऽव्ययः॥ ४२

atho muhūrta ekasmin nānāgāreṣu tāḥ striyaḥ|

yathopayeme bhagavāṃstāvadrūpadharo'vyayaḥ|| 42

अर्थ

तदनन्तर भगवान् श्रीकृष्णने एक ही मुहूर्तमें अलग-अलग भवनोंमें अलग-अलग रूप धारण करके एक ही साथ सब राजकुमारियोंका शास्त्रोक्त विधिसे पाणिग्रहण किया। सर्वशक्तिमान् अविनाशी भगवान्‌के लिये इसमें आश्‍चर्यकी कौन-सी बात है॥ ४२॥

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