तदनन्तर भगवान् श्रीकृष्णने एक ही मुहूर्तमें अलग-अलग भवनोंमें अलग-अलग रूप धारण करके एक ही साथ सब राजकुमारियोंका शास्त्रोक्त विधिसे पाणिग्रहण किया। सर्वशक्तिमान् अविनाशी भगवान्के लिये इसमें आश्चर्यकी कौन-सी बात है॥ ४२॥
अथो मुहूर्त एकस्मिन् नानागारेषु ताः स्त्रियः।
यथोपयेमे भगवांस्तावद्रूपधरोऽव्ययः॥ ४२
तदनन्तर भगवान् श्रीकृष्णने एक ही मुहूर्तमें अलग-अलग भवनोंमें अलग-अलग रूप धारण करके एक ही साथ सब राजकुमारियोंका शास्त्रोक्त विधिसे पाणिग्रहण किया। सर्वशक्तिमान् अविनाशी भगवान्के लिये इसमें आश्चर्यकी कौन-सी बात है॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.59.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 509) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/59/42/