॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.58.49
शंखभेर्यानका नेदुर्गीतवाद्यद्विजाशिषः।
नरा नार्यः प्रमुदिताः सुवासःस्रगलंकृताः॥ ४९
śaṃkhabheryānakā nedurgītavādyadvijāśiṣaḥ|
narā nāryaḥ pramuditāḥ suvāsaḥsragalaṃkṛtāḥ|| 49
अर्थ
शंख, ढोल, नगारे बजने लगे। सब ओर गाना-बजाना होने लगा। ब्राह्मण आशीर्वाद देने लगे। सुन्दर वस्त्र, पुष्पोंके हार और गहनोंसे सज-धजकर नगरके नर-नारी आनन्द मनाने लगे॥ ४९॥