श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

दृष्ट्वा तमागतं पार्था मुकुन्दमखिलेश्‍वरम्।

उत्तस्थुर्युगपद् वीराः प्राणा मुख्यमिवागतम्॥ २

dṛṣṭvā tamāgataṃ pārthā mukundamakhileśvaram|

uttasthuryugapad vīrāḥ prāṇā mukhyamivāgatam|| 2

अर्थ

जब वीर पाण्डवोंने देखा कि सर्वेश्‍वर भगवान् श्रीकृष्ण पधारे हैं तो जैसे प्राणका संचार होनेपर सभी इन्द्रियाँ सचेत हो जाती हैं, वैसे ही वे सब-के-सब एक साथ उठ खड़े हुए॥ २॥

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