श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

अक्रूरः कृतवर्मा च श्रुत्वा शतधनोर्वधम्।

व्यूषतुर्भयवित्रस्तौ द्वारकायाः प्रयोजकौ॥ २९

akrūraḥ kṛtavarmā ca śrutvā śatadhanorvadham|

vyūṣaturbhayavitrastau dvārakāyāḥ prayojakau|| 29

अर्थ

अक्रूर और कृतवर्माने शतधन्वाको सत्राजित्के वधके लिये उत्तेजित किया था। इसलिये जब उन्होंने सुना कि भगवान् श्रीकृष्णने शतधन्वाको मार डाला है, तब वे अत्यन्त भयभीत होकर द्वारकासे भाग खड़े हुए॥ २९॥

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