श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.56.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 56 · अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

एष आयाति सविता त्वां दिदृक्षुर्जगत्पते।

मुष्णन् गभस्तिचक्रेण नृणां चक्षूंषि तिग्मगुः॥ ७✎ 1178

eṣa āyāti savitā tvāṃ didṛkṣurjagatpate|

muṣṇan gabhasticakreṇa nṛṇāṃ cakṣūṃṣi tigmaguḥ|| 7

अर्थ

जगदीश्‍वर! देखिये! अपनी चमकीली किरणोंसे लोगोंके नेत्रोंको चौंधियाते हुए प्रचण्डरश्मि भगवान् सूर्य आपका दर्शन करने आ रहे हैं॥ ७॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1178 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नॄणां → नृणां

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