श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

स एव जातो वैदर्भ्यां कृष्णवीर्यसमुद्भवः।

प्रद्युम्‍न इति विख्यातः सर्वतोऽनवमः पितुः॥ २

sa eva jāto vaidarbhyāṃ kṛṣṇavīryasamudbhavaḥ|

pradyumna iti vikhyātaḥ sarvato'navamaḥ pituḥ|| 2

अर्थ

वे ही काम अबकी बार भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा रुक्मिणीजीके गर्भसे उत्पन्‍न हुए और प्रद्युम्‍न नामसे जगत‍्में प्रसिद्ध हुए। सौन्दर्य, वीर्य, सौशील्य आदि सद्गुणोंमें भगवान् श्रीकृष्णसे वे किसी प्रकार कम न थे॥ २॥✎ 2112

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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