॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.55.15
परिशोचति ते माता कुररीव गतप्रजा।
पुत्रस्नेहाकुला दीना विवत्सा गौरिवातुरा॥ १५
pariśocati te mātā kurarīva gataprajā|
putrasnehākulā dīnā vivatsā gaurivāturā|| 15
अर्थ
स्वामिन्! अपनी सन्तान आपके खो जानेसे आपकी माता पुत्रस्नेहसे व्याकुल हो रही हैं, वे आतुर होकर अत्यन्त दीनतासे रात-दिन चिन्ता करती रहती हैं। उनकी ठीक वैसी ही दशा हो रही है, जैसी बच्चा खो जानेपर कुररी पक्षीकी अथवा बछड़ा खो जानेपर बेचारी गायकी होती है’॥ १५॥