श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.53.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 53 · अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

स्रग्गन्धमाल्याभरणैर्विरजोऽम्बरभूषितैः ।

जुष्टं स्त्रीपुरुषैः श्रीमद‍्गृहैरगुरुधूपितैः॥ ९

sraggandhamālyābharaṇairvirajo'mbarabhūṣitaiḥ |

juṣṭaṃ strīpuruṣaiḥ śrīmadgṛhairagurudhūpitaiḥ|| 9

अर्थ

वहाँके स्त्री-पुरुष पुष्पमाला, हार, इत्र-फुलेल, चन्दन, गहने और निर्मल वस्त्रोंसे सजे हुए थे। वहाँके सुन्दर-सुन्दर घरोंमेंसे अगरके धूपकी सुगन्ध फैल रही थी॥ ९॥✎ 1934

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1934 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): पुष्प-माला → पुष्पमाला

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