श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.53.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 53 · अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

पुरं सम्मृष्टसंसिक्तमार्गरथ्याचतुष्पथम्।

चित्रध्वजपताकाभिस्तोरणैः समलंकृतम्॥ ८

puraṃ sammṛṣṭasaṃsiktamārgarathyācatuṣpatham|

citradhvajapatākābhistoraṇaiḥ samalaṃkṛtam|| 8

अर्थ

नगरके राजपथ, चौराहे तथा गली-कूचे झाड़-बुहार दिये गये थे, उनपर छिड़काव किया जा चुका था। चित्र-विचित्र, रंग-बिरंगी, छोटी-बड़ी झंडियाँ और पताकाएँ लगा दी गयी थीं। तोरण बाँध दिये गये थे॥ ८॥

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