श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.53.48

दशम स्कन्ध · अध्याय 53 · अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

विप्रस्त्रियः पतिमतीस्तथा तैः समपूजयत्।

लवणापूपताम्बूलकण्ठसूत्रफलेक्षुभिः॥ ४८

viprastriyaḥ patimatīstathā taiḥ samapūjayat|

lavaṇāpūpatāmbūlakaṇṭhasūtraphalekṣubhiḥ|| 48

अर्थ

तदनन्तर उक्त सामग्रियोंसे तथा नमक, पूआ, पान, कण्ठसूत्र, फल और ईखसे सुहागिन ब्राह्मणियोंकी भी पूजा की॥ ४८॥

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