बहुत-सी ब्राह्मणपत्नियाँ पुष्पमाला, चन्दन आदि सुगन्ध-द्रव्य और गहने-कपड़ोंसे सज-धजकर साथ-साथ चल रही थीं और अनेकों प्रकारके उपहार तथा पूजन आदिकी सामग्री लेकर सहस्रों श्रेष्ठ वाराङ्गनाएँ भी साथ थीं॥ ४२॥
नानोपहारबलिभिर्वारमुख्याः सहस्रशः।
स्रग्गन्धवस्त्राभरणैर्द्विजपत्न्यः स्वलंकृताः॥ ४२
बहुत-सी ब्राह्मणपत्नियाँ पुष्पमाला, चन्दन आदि सुगन्ध-द्रव्य और गहने-कपड़ोंसे सज-धजकर साथ-साथ चल रही थीं और अनेकों प्रकारके उपहार तथा पूजन आदिकी सामग्री लेकर सहस्रों श्रेष्ठ वाराङ्गनाएँ भी साथ थीं॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.53.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 471) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/53/42/