श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.53.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 53 · अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तस्या आवेदयत् प्राप्तं शशंस यदुनन्दनम्।

उक्तं च सत्यवचनमात्मोपनयनं प्रति॥ ३०

tasyā āvedayat prāptaṃ śaśaṃsa yadunandanam|

uktaṃ ca satyavacanamātmopanayanaṃ prati|| 30

अर्थ

तब ब्राह्मणदेवताने निवेदन किया कि ‘भगवान् श्रीकृष्ण यहाँ पधार गये हैं।’ और उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। यह भी बतलाया कि ‘राजकुमारीजी! आपको ले जानेकी उन्होंने सत्य प्रतिज्ञा की है’॥ ३०॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें