श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.53.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 53 · अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सा तं प्रहृष्टवदनमव्यग्रात्मगतिं सती।

आलक्ष्य लक्षणाभिज्ञा समपृच्छच्छुचिस्मिता॥ २९

sā taṃ prahṛṣṭavadanamavyagrātmagatiṃ satī|

ālakṣya lakṣaṇābhijñā samapṛcchacchucismitā|| 29

अर्थ

सती रुक्मिणीजीने देखा ब्राह्मण-देवताका मुख प्रफुल्लित है। उनके मन और चेहरेपर किसी प्रकारकी घबड़ाहट नहीं है। वे उन्हें देखकर लक्षणोंसे ही समझ गयीं कि भगवान् श्रीकृष्ण आ गये! फिर प्रसन्‍नतासे खिलकर उन्होंने ब्राह्मणदेवतासे पूछा॥ २९॥

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