श्रेष्ठ ब्राह्मणोंने साम, ऋक् और यजुर्वेदके मन्त्रोंसे उनकी रक्षा की और अथर्ववेदके विद्वान् पुरोहितने ग्रह-शान्तिके लिये हवन किया॥ १२॥✎ 1934
चक्रुः सामर्ग्यजुर्मन्त्रैर्वध्वा रक्षां द्विजोत्तमाः।
पुरोहितोऽथर्वविद् वै जुहाव ग्रहशान्तये॥ १२
श्रेष्ठ ब्राह्मणोंने साम, ऋक् और यजुर्वेदके मन्त्रोंसे उनकी रक्षा की और अथर्ववेदके विद्वान् पुरोहितने ग्रह-शान्तिके लिये हवन किया॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.53.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 468) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/53/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1934 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): पुष्प-माला → पुष्पमाला