॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.53.11
सुस्नातां सुदतीं कन्यां कृतकौतुकमंगलाम्।
अहतांशुकयुग्मेन भूषितां भूषणोत्तमैः॥ ११
susnātāṃ sudatīṃ kanyāṃ kṛtakautukamaṃgalām|
ahatāṃśukayugmena bhūṣitāṃ bhūṣaṇottamaiḥ|| 11
अर्थ
सुशोभित दाँतोंवाली परमसुन्दरी राजकुमारी रुक्मिणीजीको स्नान कराया गया, उनके हाथोंमें मंगलसूत्र कंकण पहनाये गये, कोहबर बनाया गया, दो नये-नये वस्त्र उन्हें पहनाये गये और वे उत्तम-उत्तम आभूषणोंसे विभूषित की गयीं॥ ११॥✎ 1934