॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.52.2
स वीक्ष्य क्षुल्लकान् मर्त्यान् पशून् वीरुद्वनस्पतीन्।
मत्वा कलियुगं प्राप्तं जगाम दिशमुत्तराम्॥ २
sa vīkṣya kṣullakān martyān paśūn vīrudvanaspatīn|
matvā kaliyugaṃ prāptaṃ jagāma diśamuttarām|| 2
अर्थ
उन्होंने बाहर आकर देखा कि सब-के-सब मनुष्य, पशु, लता और वृक्ष-वनस्पति पहलेकी अपेक्षा बहुत छोटे-छोटे आकारके हो गये हैं। इससे यह जानकर कि कलियुग आ गया, वे उत्तर दिशाकी ओर चल दिये॥ २॥✎ 1684