॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.52.17
प्रमथ्य तरसा राज्ञः शाल्वादींश्चैद्यपक्षगान्।
पश्यतां सर्वलोकानां तार्क्ष्यपुत्रः सुधामिव॥ १७
pramathya tarasā rājñaḥ śālvādīṃścaidyapakṣagān|
paśyatāṃ sarvalokānāṃ tārkṣyaputraḥ sudhāmiva|| 17
अर्थ
परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण भी स्वयंवरमें आये हुए शिशुपाल और उसके पक्षपाती शाल्व आदि नरपतियोंको बलपूर्वक हराकर सबके देखते-देखते, जैसे गरुड़ने सुधाका हरण किया था, वैसे ही विदर्भदेशकी राजकुमारी रुक्मिणीको हर लाये और उनसे विवाह कर लिया। रुक्मिणीजी राजा भीष्मककी कन्या और स्वयं भगवती लक्ष्मीजीका अवतार थीं॥ १६-१७॥