वही मैं तुमपर कृपा करनेके लिये ही इस गुफामें आया हूँ। तुमने पहले मेरी बहुत आराधना की है और मैं हूँ भक्तवत्सल॥ ४३॥
सोऽहं तवानुग्रहार्थं गुहामेतामुपागतः।
प्रार्थितः प्रचुरं पूर्वं त्वयाहं भक्तवत्सलः॥ ४३
वही मैं तुमपर कृपा करनेके लिये ही इस गुफामें आया हूँ। तुमने पहले मेरी बहुत आराधना की है और मैं हूँ भक्तवत्सल॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 457) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/51/43/