और पुरुषोत्तम! यदि आप हमारे बारेमें पूछें तो हम इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय हैं, मेरा नाम है मुचुकुन्द। और प्रभु! मैं युवनाश्वनन्दन महाराज मान्धाताका पुत्र हूँ॥ ३२॥
वयं तु पुरुषव्याघ्र ऐक्ष्वाकाः क्षत्रबन्धवः।
मुचुकुन्द इति प्रोक्तो यौवनाश्वात्मजः प्रभो॥ ३२
और पुरुषोत्तम! यदि आप हमारे बारेमें पूछें तो हम इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय हैं, मेरा नाम है मुचुकुन्द। और प्रभु! मैं युवनाश्वनन्दन महाराज मान्धाताका पुत्र हूँ॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 456) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/51/32/