॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.51.29
किंस्वित्तेजस्विनां तेजो भगवान् वा विभावसुः।
सूर्यः सोमो महेन्द्रो वा लोकपालोऽपरोऽपि वा॥ २९
kiṃsvittejasvināṃ tejo bhagavān vā vibhāvasuḥ|
sūryaḥ somo mahendro vā lokapālo'paro'pi vā|| 29
अर्थ
क्या आप समस्त तेजस्वियोंके मूर्तिमान् तेज अथवा भगवान् अग्निदेव तो नहीं हैं? क्या आप सूर्य, चन्द्रमा, देवराज इन्द्र या कोई दूसरे लोकपाल हैं?॥ २९॥