राजा मुचुकुन्दने कहा—‘आप कौन हैं? इस काँटोंसे भरे हुए घोर जंगलमें आप कमलके समान कोमल चरणोंसे क्यों विचर रहे हैं? और इस पर्वतकी गुफामें ही पधारनेका क्या प्रयोजन था?॥ २८॥
को भवानिह सम्प्राप्तो विपिने गिरिगह्वरे।
पद्भ्यां पद्मपलाशाभ्यां विचरस्युरुकण्टके॥ २८
राजा मुचुकुन्दने कहा—‘आप कौन हैं? इस काँटोंसे भरे हुए घोर जंगलमें आप कमलके समान कोमल चरणोंसे क्यों विचर रहे हैं? और इस पर्वतकी गुफामें ही पधारनेका क्या प्रयोजन था?॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 455) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/51/28/