॥ श्रीहरिः ॥
सुता महिष्यो भवतो ज्ञातयोऽमात्यमन्त्रिणः।
प्रजाश्च तुल्यकालीया नाधुना सन्ति कालिताः॥ १८
sutā mahiṣyo bhavato jñātayo'mātyamantriṇaḥ|
prajāśca tulyakālīyā nādhunā santi kālitāḥ|| 18
अर्थ
अब आपके पुत्र, रानियाँ, बन्धु-बान्धव और अमात्य-मन्त्री तथा आपके समयकी प्रजामेंसे कोई नहीं रहा है। सब-के-सब कालके गालमें चले गये॥ १८॥
सुता महिष्यो भवतो ज्ञातयोऽमात्यमन्त्रिणः।
प्रजाश्च तुल्यकालीया नाधुना सन्ति कालिताः॥ १८
अब आपके पुत्र, रानियाँ, बन्धु-बान्धव और अमात्य-मन्त्री तथा आपके समयकी प्रजामेंसे कोई नहीं रहा है। सब-के-सब कालके गालमें चले गये॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 454) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/51/18/