श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

चिन्तयामास भगवान् हरिः कारणमानुषः।

तद्देशकालानुगुणं स्वावतारप्रयोजनम्॥ ६

cintayāmāsa bhagavān hariḥ kāraṇamānuṣaḥ|

taddeśakālānuguṇaṃ svāvatāraprayojanam|| 6

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण पृथ्वीका भार उतारनेके लिये ही मनुष्यका-सा वेष धारण किये हुए हैं। अब उन्होंने विचार किया कि मेरे अवतारका क्या प्रयोजन है और इस समय इस स्थानपर मुझे क्या करना चाहिये॥ ६॥✎ 1682

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1682 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मगध-राज → मगधराज

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