श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

निरीक्ष्य तद्बलं कृष्ण उद्वेलमिव सागरम्।

स्वपुरं तेन संरुद्धं स्वजनं च भयाकुलम्॥ ५

nirīkṣya tadbalaṃ kṛṣṇa udvelamiva sāgaram|

svapuraṃ tena saṃruddhaṃ svajanaṃ ca bhayākulam|| 5

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने देखा—जरासन्धकी सेना क्या है, उमड़ता हुआ समुद्र है। उन्होंने यह भी देखा कि उसने चारों ओरसे हमारी राजधानी घेर ली है और हमारे स्वजन तथा पुरवासी भयभीत हो रहे हैं॥ ५॥✎ 1682

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1682 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मगध-राज → मगधराज

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