श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.44

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

अष्टादशमसंग्रामे आगामिनि तदन्तरा।

नारदप्रेषितो वीरो यवनः प्रत्यदृश्यत॥ ४४

aṣṭādaśamasaṃgrāme āgāmini tadantarā|

nāradapreṣito vīro yavanaḥ pratyadṛśyata|| 44

अर्थ

जिस समय अठारहवाँ संग्राम छिड़नेहीवाला था, उसी समय नारदजीका भेजा हुआ वीर कालयवन दिखायी पड़ा॥ ४४॥

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