श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

पित्रे मगधराजाय जरासन्धाय दुःखिते।

वेदयांचक्रतुः सर्वमात्मवैधव्यकारणम्॥ २

pitre magadharājāya jarāsandhāya duḥkhite|

vedayāṃcakratuḥ sarvamātmavaidhavyakāraṇam|| 2

अर्थ

उन दोनोंका पिता था मगधराज जरासन्ध। उससे उन्होंने बड़े दुःखके साथ अपने विधवा होनेके कारणोंका वर्णन किया॥ २॥

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