उन दोनोंका पिता था मगधराज जरासन्ध। उससे उन्होंने बड़े दुःखके साथ अपने विधवा होनेके कारणोंका वर्णन किया॥ २॥
पित्रे मगधराजाय जरासन्धाय दुःखिते।
वेदयांचक्रतुः सर्वमात्मवैधव्यकारणम्॥ २
उन दोनोंका पिता था मगधराज जरासन्ध। उससे उन्होंने बड़े दुःखके साथ अपने विधवा होनेके कारणोंका वर्णन किया॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 445) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/50/2/