परीक्षित्! सभी ग्वाल बहुमूल्य वस्त्र, गहने, अँगरखे और पगड़ियोंसे सुसज्जित होकर और अपने हाथोंमें भेंटकी बहुत-सी सामग्रियाँ ले-लेकर नन्दबाबाके घर आये॥ ८॥✎ 140014011402205922352236
महार्हवस्त्राभरणकंचुकोष्णीषभूषिताः ।
गोपाः समाययू राजन् नानोपायनपाणयः॥ ८
परीक्षित्! सभी ग्वाल बहुमूल्य वस्त्र, गहने, अँगरखे और पगड़ियोंसे सुसज्जित होकर और अपने हाथोंमें भेंटकी बहुत-सी सामग्रियाँ ले-लेकर नन्दबाबाके घर आये॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.5.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 151) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/5/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)
#1400 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): वंदीजनण् → वंदीजन
#1401 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): मागधञ् → मागध