गाय, बैल और बछड़ोंके अंगोंमें हल्दी-तेलका लेप कर दिया गया और उन्हें गेरू आदि रंगीन धातुएँ, मोरपंख, फूलोंके हार, तरह-तरहके सुन्दर वस्त्र और सोनेकी जंजीरोंसे सजा दिया गया॥ ७॥✎ 140014011402205922352236
गावो वृषा वत्सतरा हरिद्रातैलरूषिताः।
विचित्रधातुबर्हस्रग्वस्त्रकांचनमालिनः ॥ ७
गाय, बैल और बछड़ोंके अंगोंमें हल्दी-तेलका लेप कर दिया गया और उन्हें गेरू आदि रंगीन धातुएँ, मोरपंख, फूलोंके हार, तरह-तरहके सुन्दर वस्त्र और सोनेकी जंजीरोंसे सजा दिया गया॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.5.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 151) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/5/7/
टिप्पणियाँ
२
षाः सवत्साश्च हरि०।
(मुद्रित पृष्ठ 151)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)
#1400 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): वंदीजनण् → वंदीजन
#1401 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): मागधञ् → मागध