श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.48.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 48 · अथाष्टचत्वारिंशोऽध्यायः

युवां प्रधानपुरुषौ जगद्धेतू जगन्मयौ।

भवद‍्भ्यां न विना किंचित् परमस्ति न चापरम्॥ १८

yuvāṃ pradhānapuruṣau jagaddhetū jaganmayau|

bhavadbhyāṃ na vinā kiṃcit paramasti na cāparam|| 18

अर्थ

आप दोनों जगत‍्के कारण और जगद्रूप, आदिपुरुष हैं। आपके अतिरिक्त और कोई वस्तु नहीं है, न कारण और न तो कार्य॥ १८॥✎ 1680

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1680 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: भर-कर → भरकर

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