श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.42

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

युवयोरेव नैवायमात्मजो भगवान् हरिः।

सर्वेषामात्मजो ह्यात्मा पिता माता स ईश्‍वरः॥ ४२✎ 1173

yuvayoreva naivāyamātmajo bhagavān hariḥ|

sarveṣāmātmajo hyātmā pitā mātā sa īśvaraḥ|| 42

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण केवल आप दोनोंके ही पुत्र नहीं हैं, वे समस्त प्राणियोंके आत्मा, पुत्र, पिता-माता और स्वामी भी हैं॥ ४२॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1173 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ४ → ४२

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें