न तो उनकी कोई माता है और न पिता। न पत्नी है और न तो पुत्र आदि। न अपना है और न तो पराया। न देह है और न तो जन्म ही॥ ३८॥
न माता न पिता तस्य न भार्या न सुतादयः।
नात्मीयो न परश्चापि न देहो जन्म एव च॥ ३८
न तो उनकी कोई माता है और न पिता। न पत्नी है और न तो पुत्र आदि। न अपना है और न तो पराया। न देह है और न तो जन्म ही॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.46.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 419) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/46/38/