श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

एतौ हि विश्‍वस्य च बीजयोनी

रामो मुकुन्दः पुरुषः प्रधानम्।

अन्वीय भूतेषु विलक्षणस्य

ज्ञानस्य चेशात इमौ पुराणौ॥ ३१

etau hi viśvasya ca bījayonī

rāmo mukundaḥ puruṣaḥ pradhānam|

anvīya bhūteṣu vilakṣaṇasya

jñānasya ceśāta imau purāṇau|| 31

अर्थ

बलराम और श्रीकृष्ण पुराणपुरुष हैं; वे सारे संसारके उपादानकारण और निमित्तकारण भी हैं। भगवान् श्रीकृष्ण पुरुष हैं तो बलरामजी प्रधान (प्रकृति)। ये ही दोनों समस्त शरीरोंमें प्रविष्ट होकर उन्हें जीवनदान देते हैं और उनमें उनसे अत्यन्त विलक्षण जो ज्ञानस्वरूप जीव है, उसका नियमन करते हैं॥ ३१॥

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