श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.45.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 45 · अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः

उवाच पितरावेत्य साग्रजः सात्वतर्षभः।

प्रश्रयावनतः प्रीणन्‍नम्ब तातेति सादरम्॥ २

uvāca pitarāvetya sāgrajaḥ sātvatarṣabhaḥ|

praśrayāvanataḥ prīṇannamba tāteti sādaram|| 2

अर्थ

यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण बड़े भाई बलरामजीके साथ अपने माँ-बापके पास जाकर आदरपूर्वक और विनयसे झुककर ‘मेरी अम्मा! मेरे पिताजी!’ इन शब्दोंसे उन्हें प्रसन्‍न करते हुए कहने लगे—॥ २॥

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