॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.45.3
नास्मत्तो युवयोस्तात नित्योत्कण्ठितयोरपि।
बाल्यपौगण्डकैशोराः पुत्राभ्यामभवन् क्वचित्॥ ३
nāsmatto yuvayostāta nityotkaṇṭhitayorapi|
bālyapaugaṇḍakaiśorāḥ putrābhyāmabhavan kvacit|| 3
अर्थ
‘पिताजी! माताजी! हम आपके पुत्र हैं और आप हमारे लिये सर्वदा उत्कण्ठित रहे हैं, फिर भी आप हमारे बाल्य, पौगण्ड और किशोर-अवस्थाका सुख हमसे नहीं पा सके॥ ३॥