कंसके कंक और न्यग्रोध आदि आठ छोटे भाई थे। वे अपने बड़े भाईका बदला लेनेके लिये क्रोधसे आगबबूले होकर भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामकी ओर दौड़े॥ ४०॥
तस्यानुजा भ्रातरोऽष्टौ कंकन्यग्रोधकादयः।
अभ्यधावन्नभिक्रुद्धा भ्रातुर्निर्वेशकारिणः॥ ४०
कंसके कंक और न्यग्रोध आदि आठ छोटे भाई थे। वे अपने बड़े भाईका बदला लेनेके लिये क्रोधसे आगबबूले होकर भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामकी ओर दौड़े॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.44.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 406) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/44/40/