श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.44.41

दशम स्कन्ध · अध्याय 44 · अथ चतुश्‍चत्वारिंशोऽध्यायः

तथातिरभसांस्तांस्तु संयत्तान् रोहिणीसुतः।

अहन् परिघमुद्यम्य पशूनिव मृगाधिपः॥ ४१

tathātirabhasāṃstāṃstu saṃyattān rohiṇīsutaḥ|

ahan parighamudyamya paśūniva mṛgādhipaḥ|| 41

अर्थ

जब भगवान् बलरामजीने देखा कि वे बड़े वेगसे युद्धके लिये तैयार होकर दौड़े आ रहे हैं, तब उन्होंने परिघ उठाकर उन्हें वैसे ही मार डाला, जैसे सिंह पशुओंको मार डालता है॥ ४१॥

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