श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.44.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 44 · अथ चतुश्‍चत्वारिंशोऽध्यायः

गोपान् वयस्यानाकृष्य तैः संसृज्य विजह्रतुः।✎ 1171

वाद्यमानेषु तूर्येषु वल्गन्तौ रुतनूपुरौ॥ २९

gopān vayasyānākṛṣya taiḥ saṃsṛjya vijahratuḥ|

vādyamāneṣu tūryeṣu valgantau rutanūpurau|| 29

अर्थ

उनके भाग जानेपर भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी अपने समवयस्क ग्वाल-बालोंको खींच-खींचकर उनके साथ भिड़ने और नाच-नाचकर भेरीध्वनिके साथ अपने नूपुरोंकी झनकारको मिलाकर मल्लक्रीडा—कुश्तीके खेल करने लगे॥ २९॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1171 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विजहृतु:। → विजह्रतुः।

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