उनके भाग जानेपर भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी अपने समवयस्क ग्वाल-बालोंको खींच-खींचकर उनके साथ भिड़ने और नाच-नाचकर भेरीध्वनिके साथ अपने नूपुरोंकी झनकारको मिलाकर मल्लक्रीडा—कुश्तीके खेल करने लगे॥ २९॥
गोपान् वयस्यानाकृष्य तैः संसृज्य विजह्रतुः।
वाद्यमानेषु तूर्येषु वल्गन्तौ रुतनूपुरौ॥ २९
उनके भाग जानेपर भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी अपने समवयस्क ग्वाल-बालोंको खींच-खींचकर उनके साथ भिड़ने और नाच-नाचकर भेरीध्वनिके साथ अपने नूपुरोंकी झनकारको मिलाकर मल्लक्रीडा—कुश्तीके खेल करने लगे॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.44.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 405) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/44/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1171 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विजहृतु:। → विजह्रतुः।