उन्हें अपने सामने न देखकर कुवलयापीडको बड़ा क्रोध हुआ। उसने सूँघकर भगवान्को अपनी सूँड़से टटोल लिया और पकड़ा भी; परन्तु उन्होंने बलपूर्वक अपनेको उससे छुड़ा लिया॥ ७॥
संक्रुद्धस्तमचक्षाणो घ्राणदृष्टिः स केशवम्।
परामृशत् पुष्करेण स प्रसह्य विनिर्गतः॥ ७
उन्हें अपने सामने न देखकर कुवलयापीडको बड़ा क्रोध हुआ। उसने सूँघकर भगवान्को अपनी सूँड़से टटोल लिया और पकड़ा भी; परन्तु उन्होंने बलपूर्वक अपनेको उससे छुड़ा लिया॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.43.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 397) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/43/7/