कुवलयापीडने भगवान्की ओर झपटकर उन्हें बड़ी तेजीसे सूँड़में लपेट लिया; परन्तु भगवान् सूँड़से बाहर सरक आये और उसे एक घूँसा जमाकर उसके पैरोंके बीचमें जा छिपे॥ ६॥
करीन्द्रस्तमभिद्रुत्य करेण तरसाग्रहीत्।
कराद् विगलितः सोऽमुं निहत्याङ्घ्रिष्वलीयत॥ ६
कुवलयापीडने भगवान्की ओर झपटकर उन्हें बड़ी तेजीसे सूँड़में लपेट लिया; परन्तु भगवान् सूँड़से बाहर सरक आये और उसे एक घूँसा जमाकर उसके पैरोंके बीचमें जा छिपे॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.43.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 397) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/43/6/