॥ श्रीहरिः ॥
बद्ध्वा परिकरं शौरिः समुह्य कुटिलालकान्।
उवाच हस्तिपं वाचा मेघनादगभीरया॥ ३
baddhvā parikaraṃ śauriḥ samuhya kuṭilālakān|
uvāca hastipaṃ vācā meghanādagabhīrayā|| 3
अर्थ
तब भगवान् श्रीकृष्णने अपनी कमर कस ली और घुँघराली अलकें समेट लीं तथा मेघके समान गम्भीर वाणीसे महावतको ललकारकर कहा॥ ३॥
बद्ध्वा परिकरं शौरिः समुह्य कुटिलालकान्।
उवाच हस्तिपं वाचा मेघनादगभीरया॥ ३
तब भगवान् श्रीकृष्णने अपनी कमर कस ली और घुँघराली अलकें समेट लीं तथा मेघके समान गम्भीर वाणीसे महावतको ललकारकर कहा॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.43.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 397) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/43/3/