॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.43.4
अम्बष्ठाम्बष्ठ मार्गं नौ देह्यपक्रम मा चिरम्।
नो चेत् सकुंजरं त्वाद्य नयामि यमसादनम्॥ ४
ambaṣṭhāmbaṣṭha mārgaṃ nau dehyapakrama mā ciram|
no cet sakuṃjaraṃ tvādya nayāmi yamasādanam|| 4
अर्थ
‘महावत, ओ महावत! हम दोनोंको रास्ता दे दे। हमारे मार्गसे हट जा। अरे, सुनता नहीं? देर मत कर। नहीं तो मैं हाथीके साथ अभी तुझे यमराजके घर पहुँचाता हूँ’॥ ४॥